कुछ बच्चे और कई बच्चे

हेमंत कुकरेतीहेमंत कुकरेती13 Mar 1965

1 min read · 12.4K reads

बिस्कुट जैसी होती है बच्चों की हँसी

और ग़ुस्सा चॉकलेट की तरह

उन्हें हम उनकी नहीं अपनी दुनिया में देखते हैं

और उनके बारे में फ़ैसले करते हैं

कितना बड़ा अपराध है यह

सज़ा के नाम पर बच्चे हमसे रूठ जाते हैं तो

हम माफ़ी नहीं माँगते वादे करते हैं

और अगले दिन पर टाल देते हैं अपनी हार

हमें पता है कि उनका ग़ुस्सा घुल जाएगा थोड़ी देर में

तब तक उन्हें हँसता देखकर हम इत्मीनान से चाय पीएँगे

और बिल्कुल भूल जाएँगे कि

कई बच्चों के लिए रोटी पहेली की तरह है

और जीवित बच जाना आश्चर्य जैसा

सिर्फ़ शर्मिंदा ही हुआ जा सकता है इस सच पर कि

सभी बच्चों की हँसी बिस्कुट जैसी नहीं होती

और ग़ुस्सा चॉकलेट की तरह...

हेमंत कुकरेती
About the poet

हेमंत कुकरेती

सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड

View profile & all 15 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like