यह अंगार चखता रहा
मैं पानी पीते-पीते
मरता रहा
यह अंगार चखता रहा
मैं पानी पीते-पीते
मरता रहा

सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड
View profile & all 15 Poems / Storiesजाने कहाँ की सभ्यता से निकला है वहपत्थर नहीं है वह केवल
मैं एक मनुष्य हूँशरीर के लिए मेरा जन्म नहीं हुआ
आओ! चाँद पर नाव चलाते हैंउसने गंभीर होकर कहा
उसका रंग चटक हैउसके प्रेम में देखते ही पड़ गया था बच्चा
कवियों के बारे में कोई कवितासारा कुछ नहीं बताती