नया बस्ता

हेमंत कुकरेतीहेमंत कुकरेती13 Mar 1965

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उसका रंग चटक है

उसके प्रेम में देखते ही पड़ गया था बच्चा

उससे फूटती है गंध

बच्चा उसमें नहा जाता है

बच्चे के सपने में वह आग से घिरा रहता है

पहाड़ से धकेल रहे होते हैं उसे कई भयानक हाथ

रात-भर नींद में भी बूँधा रहता है वह

बच्चे के कंधे पर

आँखे खुलने पर बच्चा

उसके गले में पाता है अपनी बाँहें

कभी बच्चा उससे हाथ मिलाता है

कभी उसे विदा करने को उठे बच्चे के हाथ

हवा में ही जम जाते हैं उसे हँसता देखकर

वह बच्चे को समय पर घर लाता है

एक कोने पर रखा वह सागर कपाल पर

टापू की तरह चमकता है

ज़्यादा ख़ुश होने पर बच्चे को वह

इस दुनिया से परे की चीज़ लगता है

तब बच्चा मुस्कुराने से भी डरता है

वह जगमगा उठा है

बच्चे के मन से झरती रोशनी में

हेमंत कुकरेती
About the poet

हेमंत कुकरेती

सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड

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