जोशीमठ दरक रहा है
नहीं दरक रहा है जोशीमठ
दरक रही है मिट्टी की ताक़त
मिट्टी का वजूद
उपजाऊ मिट्टी के सीने पर
खड़े हैं कंक्रीट के जंगल
तीसरी दुनिया में निवेश के व्यापारी
न्यूयार्क में अपने गेहूँ के फ़ाॅर्महाउस से
विकास के स्थानीय कर्णधारों से बात करके
कर रहे हैं अट्टहास
दूसरी ओर उन्मुक्त पर्यटकों ने
रौंद दिया है पहाड़ों को
प्लास्टिक के कचरों से
दबा दी है पहाड़ों की साँसें
प्रकृति-विरुद्ध मानव-निर्माण
रेल, हाईवे और बाँध
और प्रकृति-विरुद्ध मानव-कर्म
उपजाऊ ज़मीनों की तरह
एक दिन लील जाएँगे सभी धाम








