झरने पानी बहता रूप भर नहीं है वे अतृप्त शिलाओं की आहें हैं उनके आँसू ही बनते बादल भीगकर जिसमें ताज़गी से भर उठता जीवन #प्रकृति#जीवन#आँसू#पानी#बादल#पर्वत#आह#पानJoin Our WhatsApp Community