इतिहास में दर्ज होने की हड़बड़ी
सनक में बदल जाती है
तुग़लक़ को
इतिहास में दर्ज होने की हड़बड़ी ही तो थी
तभी तो उसने कहा
आज से राजधानी
दिल्ली नहीं दौलताबाद होगी
इतिहास में दर्ज होने की हड़बड़ी ने ही
हिटलर से लाखों यहूदियों का क़त्ल करवा दिया
बख़्तियार ख़िलजी ने तो नालंदा विश्वविद्यालय में आग ही लगवा दिया
गोडसे ने महान शख़्सियत गाँधी को मौत के घाट उतार दिया
इतिहास में दर्ज होने की हड़बड़ी में
और भी बहुत से करामात हुए, होते आ रहे हैं
ऐसे शासकों, आक्रांताओं, कट्टरता के पुरोधाओं से
ज़रूरत है सचेत होने की
जो इतिहास में दर्ज होने की हड़बड़ी में
सनक जाते हैं
हर पत्थर पर अपना नाम देख लेना चाहते हैं
हर योजना में शामिल हो जाना चाहते हैं
चाहे वह भले ही जनता की क़ब्रगाह बन रही हो








