एकात्म

उत्कर्षउत्कर्ष1 Sept 1995

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हम कैसे जान पाते

बगुलों का युगल-गान

एकांत में घोलता है अगाध प्रेम

हम कैसे जान पाते

पूरी प्रक्रिया

पतझड़

वसंत

बरसात

भटकना

और फ़रवरी

अप्रैल हर साल पूरे बीते साल का संधि-बिंदु होता है

हम

यात्रा में

हठयोग में

इस तरह

रहते हैं निरंतर

मिलन तक

कोकिल तत्सम में मूक

तद्भव में मीठी तान गा रही है

तीसरे पहर के आखिरी आलाप में!

उत्कर्ष
About the poet

उत्कर्ष

नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय। मूल नाम : उत्कर्ष जन्म : 01/09/1995 | पटना, बिहार

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