About उत्कर्ष
नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय। मूल नाम : उत्कर्ष जन्म : 01/09/1995 | पटना, बिहार
Selected Quotes
Poetry & Stories
संसार का समग्र आत्मकथ्य
अनंत ब्रह्मांड में यह पृथ्वीबुनाई का शायद महज़
रात, चाँद और गिटार
तब तकगमले में रातरानी लौट चुकी थी
मैं तुम्हें वहाँ मिलूँगा
ऐसे समय में जब सब खोज रहे हैं अपना पता—कहीं बाहर—किसी भीड़ में।तुम मुझे खोजना किसी भीड़ से अलग—नदी किनारे।
घर अकेला रह गया है
बरसात हुई बहुत उस रोज़जैसे बादल फट पड़ा हो
जा चुके लोग
यहाँ सन्नाटा है—पसरा हुआ—छूटने की गंध में डूबा।
About उत्कर्ष
नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय।
मूल नाम : उत्कर्षजन्म : 01/09/1995 | पटना, बिहार
नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय। उत्कर्ष was born on 1 September 1995. Associated place: पटना, बिहार. Kavishala has 10 poems and stories by उत्कर्ष, free to read on this page, along with selected quotes you can share.उत्कर्ष: Quick Answers
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Poems & Stories by उत्कर्ष
संसार का समग्र आत्मकथ्य
अनंत ब्रह्मांड में यह पृथ्वीबुनाई का शायद महज़
रात, चाँद और गिटार
तब तकगमले में रातरानी लौट चुकी थी
मैं तुम्हें वहाँ मिलूँगा
ऐसे समय में जब सब खोज रहे हैं अपना पता—कहीं बाहर—किसी भीड़ में।तुम मुझे खोजना किसी भीड़ से अलग—नदी किनारे।
घर अकेला रह गया है
बरसात हुई बहुत उस रोज़जैसे बादल फट पड़ा हो
जा चुके लोग
यहाँ सन्नाटा है—पसरा हुआ—छूटने की गंध में डूबा।
तुम्हारे देस में
मीठा है झील का पानीजैसे अभी निकला हो
लौटा करूँगा
मैं देख रहा हूँइस शताब्दी के सारे दुखों को जलते हुए
प्रतीक्षा
टेसू और गुलमोहर के बीच मीलों की दूरी और उसे पाटतीघाट की प्रतीक्षारत सीढ़ियाँ
एकात्म
हम कैसे जान पातेबगुलों का युगल-गान
कि टुकड़ों में है दुनिया
बिसेसर आदमी ज़ात का हैऔर इतनी ही है उसकी दुनिया
Selected Quotes by उत्कर्ष (चुनिंदा उद्धरण)
मीठा है झील का पानीजैसे अभी निकला होअनंत ब्रह्मांड में यह पृथ्वीबुनाई का शायद महज़बरसात हुई बहुत उस रोज़जैसे बादल फट पड़ा होयहाँ सन्नाटा है—पसरा हुआ—छूटने की गंध में डूबा।बिसेसर आदमी ज़ात का हैऔर इतनी ही है उसकी दुनियाऐसे समय में जब सब खोज रहे हैं अपना पता—कहीं बाहर—किसी भीड़ में।तुम मुझे खोजना किसी भीड़ से अलग—नदी किनारे।Videos on उत्कर्ष
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