About सय्यदा फ़रहत
मूल नाम : करामत फ़ातिमा जन्म : 01 Apr 1938 | भोपाल, मध्य प्रदेश निधन : 11 Feb 2003
Selected Quotes
Poetry & Stories
न क़सीदा न ग़ज़ल और न रुबाई लिखिए
न क़सीदा न ग़ज़ल और न रुबाई लिखिएदौर-ए-मौजूदा में कुछ दिल की तबाही लिखिए
ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानें
ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानेंये इश्क़ के मा'नी क्या समझें ये हुस्न की क़ीमत क्या जानें
वो रूह बन के मिरी फ़िक्र और शुऊ'र में है
वो रूह बन के मिरी फ़िक्र और शुऊ'र में हैवो एक दर्द है जो क़ल्ब-ए-ना-सुबूर में है
शोर इतना बढ़ा हर सदा गुम हुई
शोर इतना बढ़ा हर सदा गुम हुईभीड़ में मेरी आवाज़-ए-पा गुम हुई
न फ़र्श-ए-ख़ाक पे ठहरेंगे नक़्श-ए-पा की तरह
न फ़र्श-ए-ख़ाक पे ठहरेंगे नक़्श-ए-पा की तरहरवाँ-दवाँ हैं फ़ज़ाओं में हम हवा की तरह
About सय्यदा फ़रहत
मूल नाम : करामत फ़ातिमा
जन्म : 01 Apr 1938 | भोपाल, मध्य प्रदेश
निधन : 11 Feb 2003
सय्यदा फ़रहत: Quick Answers
Who is सय्यदा फ़रहत?
मूल नाम : करामत फ़ातिमा जन्म : 01 Apr 1938 | भोपाल, मध्य प्रदेश निधन : 11 Feb 2003
When was सय्यदा फ़रहत born?
सय्यदा फ़रहत was born on 1 April 1938. Associated place: अलीगढ़, भारत.
When did सय्यदा फ़रहत die?
सय्यदा फ़रहत passed away on 11 February 2003.
Where can I read सय्यदा फ़रहत's poetry?
Kavishala has 46 poems and stories and 2 couplets (sher) by सय्यदा फ़रहत, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by सय्यदा फ़रहत
न क़सीदा न ग़ज़ल और न रुबाई लिखिए
न क़सीदा न ग़ज़ल और न रुबाई लिखिएदौर-ए-मौजूदा में कुछ दिल की तबाही लिखिए
ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानें
ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानेंये इश्क़ के मा'नी क्या समझें ये हुस्न की क़ीमत क्या जानें
वो रूह बन के मिरी फ़िक्र और शुऊ'र में है
वो रूह बन के मिरी फ़िक्र और शुऊ'र में हैवो एक दर्द है जो क़ल्ब-ए-ना-सुबूर में है
शोर इतना बढ़ा हर सदा गुम हुई
शोर इतना बढ़ा हर सदा गुम हुईभीड़ में मेरी आवाज़-ए-पा गुम हुई
न फ़र्श-ए-ख़ाक पे ठहरेंगे नक़्श-ए-पा की तरह
न फ़र्श-ए-ख़ाक पे ठहरेंगे नक़्श-ए-पा की तरहरवाँ-दवाँ हैं फ़ज़ाओं में हम हवा की तरह
बर्क़-रफ़्तार ज़माना है थका देगा तुम्हें
बर्क़-रफ़्तार ज़माना है थका देगा तुम्हेंइक ज़रा दम भी जो लोगे तो गिरा देगा तुम्हें
बहर-ए-हस्ती में तलातुम कभी ऐसा तो न था
बहर-ए-हस्ती में तलातुम कभी ऐसा तो न थाख़ैर-ओ-शर का ये तसादुम कभी ऐसा तो न था
सोज़-ए-दिल पास-ए-वफ़ा दर्द-ए-जिगर है कि नहीं
सोज़-ए-दिल पास-ए-वफ़ा दर्द-ए-जिगर है कि नहींजो था मस्जूद-ए-मलाइक वो बशर है कि नहीं
सय्यदा फ़रहत के शेर
तिरे भूल जाने की आदत के सदक़ेतुझे भूल जाने को जी चाहता है
भाई बहन - नज़्म
देखो भय्या मान भी जाओमेरा घरौंदा यूँ न गिराओ
अलीगढ़ - नज़्म
अलीगढ़ है यहाँ ऐ दोस्त क्या पाया नहीं जातायहाँ वो कौन सा शो है जो दिखलाया नहीं जाता
नई कहानी - नज़्म
हम न सुनेंगे अब ये कहानीएक था राजा एक थी रानी
Selected Quotes by सय्यदा फ़रहत (चुनिंदा उद्धरण)
तिरे भूल जाने की आदत के सदक़े तुझे भूल जाने को जी चाहता हैबात क्यूँ खोएँ इल्तिजा कर के तुम से उम्मीद-ए-इल्तिफ़ात नहींदेखो भय्या मान भी जाओमेरा घरौंदा यूँ न गिराओअलीगढ़ है यहाँ ऐ दोस्त क्या पाया नहीं जातायहाँ वो कौन सा शो है जो दिखलाया नहीं जाताहम न सुनेंगे अब ये कहानीएक था राजा एक थी रानीन क़सीदा न ग़ज़ल और न रुबाई लिखिएदौर-ए-मौजूदा में कुछ दिल की तबाही लिखिएCouplets (Sher) by सय्यदा फ़रहत
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