तिरे भूल जाने की आदत के सदक़े
तुझे भूल जाने को जी चाहता है
बात क्यूँ खोएँ इल्तिजा कर के
तुम से उम्मीद-ए-इल्तिफ़ात नहीं
तिरे भूल जाने की आदत के सदक़े
तुझे भूल जाने को जी चाहता है
बात क्यूँ खोएँ इल्तिजा कर के
तुम से उम्मीद-ए-इल्तिफ़ात नहीं

मूल नाम : करामत फ़ातिमा जन्म : 01 Apr 1938 | भोपाल, मध्य प्रदेश निधन : 11 Feb 2003
View profile & all 46 Poems / Storiesन क़सीदा न ग़ज़ल और न रुबाई लिखिएदौर-ए-मौजूदा में कुछ दिल की तबाही लिखिए
ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानेंये इश्क़ के मा'नी क्या समझें ये हुस्न की क़ीमत क्या जानें
वो रूह बन के मिरी फ़िक्र और शुऊ'र में हैवो एक दर्द है जो क़ल्ब-ए-ना-सुबूर में है
शोर इतना बढ़ा हर सदा गुम हुईभीड़ में मेरी आवाज़-ए-पा गुम हुई
न फ़र्श-ए-ख़ाक पे ठहरेंगे नक़्श-ए-पा की तरहरवाँ-दवाँ हैं फ़ज़ाओं में हम हवा की तरह