किसी की भी हो पीठ
काम है लादना और ढोना
कैसे? यह सिखाता है हमें एक कुली
जो बरतता है सबसे बेहतर तरीके से अपनी पीठ
जिस पर ढो ले जाता है अपना पूरा परिवार
होता यूं है कि
उसकी गरदन को पड़ता है झुकाव का अभ्यास
कमर में लोच
की रीढ़ टूटने से बची रहे
इस तरह पीठ का भार गरदन और कमर के साथ
बराबर अनुपात में बंट जाता है
नई दिल्ली स्टेशन पर
एक नंबर से सोलह नंबर प्लेटफार्म तक
कुली इसी तरह आता-जाता है
पीठ और पैसेंजर दोनों प्रसन्न हैं








