पीठ

प्रताप सोमवंशीप्रताप सोमवंशी20 Sept 1968

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किसी की भी हो पीठ
काम है लादना और ढोना
कैसे? यह सिखाता है हमें एक कुली
जो बरतता है सबसे बेहतर तरीके से अपनी पीठ
जिस पर ढो ले जाता है अपना पूरा परिवार
होता यूं है कि
उसकी गरदन को पड़ता है झुकाव का अभ्यास
कमर में लोच
की रीढ़ टूटने से बची रहे
इस तरह पीठ का भार गरदन और कमर के साथ
बराबर अनुपात में बंट जाता है
नई दिल्ली स्टेशन पर
एक नंबर से सोलह नंबर प्लेटफार्म तक
कुली इसी तरह आता-जाता है
पीठ और पैसेंजर दोनों प्रसन्न हैं

प्रताप सोमवंशी
About the poet

प्रताप सोमवंशी

#PratapSomvanshi अपने भीतर है जो इंसान बचाकर रखना अपनी मिट्टी की ये पहचान बचाकर रखना परिचय. जन्म : 2 नवंबर 1968.

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