ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानें

सय्यदा फ़रहतसय्यदा फ़रहत1 Apr 1938 – 11 Feb 2003

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ये हिर्स-ओ-हवस के सौदाई आदाब-ए-मोहब्बत क्या जानें

ये इश्क़ के मा'नी क्या समझें ये हुस्न की क़ीमत क्या जानें

हम चूमते रहते हैं हर दम फ़ितरत की हसीं पेशानी को

आज़ाद-मनश हम अहल-ए-नज़र क़ानून-ओ-शरीअ'त क्या जानें

हो ख़ौफ़-ए-जहन्नम जिस में निहाँ जन्नत की हवस हो जिस में अयाँ

अल्लाह के सादा-दिल बंदे हम ऐसी इबादत क्या जानें

हों फूलों की सेजें जिन के लिए काँटों की चुभन क्या समझेंगे

जिन के न लगी हो चोट कभी वो दर्द की लज़्ज़त क्या जानें

जो सीम-ओ-ज़र में तोलते हैं कौनैन की हर इक जिंस-ए-गिराँ

इंसान के दिल की क़ीमत को वो साहब-ए-दौलत क्या जानें

इंसान जहाँ भी पाते हैं हम दिल से उसे अपनाते हैं

ये मज़हब-ओ-मिल्लत के झगड़े हम अहल-ए-मोहब्बत क्या जानें

सय्यदा फ़रहत
About the poet

सय्यदा फ़रहत

मूल नाम : करामत फ़ातिमा जन्म : 01 Apr 1938 | भोपाल, मध्य प्रदेश निधन : 11 Feb 2003

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