About लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
‘साहित्यर्थी’ और ‘रसराज’ के रूप में सुप्रसिद्ध असमिया कवि-लेखक-व्यंग्यकार।
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About लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
‘साहित्यर्थी’ और ‘रसराज’ के रूप में सुप्रसिद्ध असमिया कवि-लेखक-व्यंग्यकार।
लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ: Quick Answers
Who is लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ?
‘साहित्यर्थी’ और ‘रसराज’ के रूप में सुप्रसिद्ध असमिया कवि-लेखक-व्यंग्यकार।
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Kavishala has 13 poems and stories by लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
निमाती कन्या
एकरतनपुर के राजा की थी वह इकलौती बिटिया
प्रियतमा
एकप्रश्न : जन्म से ही सुनता आया हूँ
प्रेम
ब्रह्मांड का सच झर रहा निरंतरगिर-वन, वृक्ष-लता सबको सचेतन कर
प्रियतमा का सौंदर्य
किसलिए चाहिए सिंदूरी गालप्रेमी पतंग की आग, अरे
कविता
शोक का संगीत वह, विषाद का है सुरआर्त्त की है आह, है आँखों के आँसू
पानी, कमल पत्ते पर
एककमल पत्ते पर कितने मोती
ओ मेरे अपने देश
ओ मेरे अपने देशओ मेरे सुहाने देश
अवशेष
खिली मालती झड़ गिरी खिलकररह गई जगत में वितरित सुरभि-भर।
वसंत
एकमालती खिली, सेउती खिलती
बड़ा और छोटा
एकदूब-पत्ती की नोकों पर
धनबर और रतनी
आई उजान* में भाठी* की रतनीह्दय-माधुरी लेकर
तारे
अनंत आकाश में विराजित कौन हो तुम सारे,किस कारण से यों ध्यानमग्न, हैं क्या कोई दुख-शोक तुम्हारे?
Selected Quotes by लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ (चुनिंदा उद्धरण)
अनंत आकाश में विराजित कौन हो तुम सारे,किस कारण से यों ध्यानमग्न, हैं क्या कोई दुख-शोक तुम्हारे?ब्रह्मांड का सच झर रहा निरंतरगिर-वन, वृक्ष-लता सबको सचेतन करकिसलिए चाहिए सिंदूरी गालप्रेमी पतंग की आग, अरेशोक का संगीत वह, विषाद का है सुरआर्त्त की है आह, है आँखों के आँसूआई उजान* में भाठी* की रतनीह्दय-माधुरी लेकरओ मेरे अपने देशओ मेरे सुहाने देशVideos on लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
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