लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ, poet
Sootradhar · Author

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

नगांव, असम

  • 13 Poems & Stories
  • 160.7K Reads

About लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

‘साहित्यर्थी’ और ‘रसराज’ के रूप में सुप्रसिद्ध असमिया कवि-लेखक-व्यंग्यकार।

Selected Quotes

अनंत आकाश में विराजित कौन हो तुम सारे,किस कारण से यों ध्यानमग्न, हैं क्या कोई दुख-शोक तुम्हारे?
— लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
Read full
ब्रह्मांड का सच झर रहा निरंतरगिर-वन, वृक्ष-लता सबको सचेतन कर
— लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
Read full

More Poetry & Stories You May Like

नवजातकअनागत दिन की गिनती करके पृथिवी के विशाल वक्ष मेंआगंतुक नवजातक का— बीरेन बरकटकीअहल्या पृथिवीवन्ध्या पृथिवी में अँधेरा उतर रहा हैअब बहुत रात है।— बीरेन बरकटकीडायरीऐसा एक रोज़ था जब दुनिया का सब विषाद आकाश मेंइकट्ठा हुआ था।— बिरेश्वर बरुआउज्जीवनसूर्य-स्नात किसी एक नए दिन की हँसी की सिंफनीरात का तुहिन-स्पर्श तोड़कर भाग आती है— होमेन बरगोहाईअप्रतिद्वंद्वीमृत्यु से कौन लड़ता है, जीवन का संगीत मृत्यु की सूक्ष्मता में शुद्धस्वर जिस की ध्वनि की प्रकृत उद्धृति है, मेरी पीठ पर हाथ रख— हीरेन भट्टाचार्यमेरी शस्य-श्यामलामौसम है बड़ा रूखाधधक उठा हवा में— हीरेन भट्टाचार्य