ओ मेरे अपने देश

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआलक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

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ओ मेरे अपने देश

ओ मेरे सुहाने देश

मधुमय ऐसे, फलमय ऐसे

ऐसे प्यारे देश!

ओ मेरी मधुभरी बोली

असम की सुधासनी बोली

ज़िंदगी भर दें जो न्यौछावर

जग में कहाँ मिलेगी अनमोली?

ओ मेरी जन्मभूमि

ओ मेरी असम-जननी

देखूँ तो माँ, मुख तुम्हारा

तुम्हें देखने का आग्रह मेरा

अब तक भी तो मिटा नहीं।

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
About the poet

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

‘साहित्यर्थी’ और ‘रसराज’ के रूप में सुप्रसिद्ध असमिया कवि-लेखक-व्यंग्यकार।

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