ओ मेरे अपने देश
ओ मेरे सुहाने देश
मधुमय ऐसे, फलमय ऐसे
ऐसे प्यारे देश!
ओ मेरी मधुभरी बोली
असम की सुधासनी बोली
ज़िंदगी भर दें जो न्यौछावर
जग में कहाँ मिलेगी अनमोली?
ओ मेरी जन्मभूमि
ओ मेरी असम-जननी
देखूँ तो माँ, मुख तुम्हारा
तुम्हें देखने का आग्रह मेरा
अब तक भी तो मिटा नहीं।








