एक
मालती खिली, सेउती खिलती
केतकी ने ली अँगड़ाई
सुरमयी कोयल छेड़ तान
संदेशा वन को लाई
दो
कण-कण से तारे बिखरेती बकुल
मंदार खेलता होली,
जूही भरती साँस
कमल ने आँखें खोलीं।
तीन
करवीर-कोष में मधु संचय
करती फैलाती चंपा
मधु मतवाली पीली चिड़िया
फिर लौटी कर अनुकंपा।








