पानी, कमल पत्ते पर

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआलक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

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एक

कमल पत्ते पर कितने मोती

जगमग करते झलमल

किसके ये मोती? कौन बताए?

छोड़ गई है कौन अमल?

रूप-व्यापारिन देव-कन्या ने

यहीं किया था स्नान

गले का हार रखा उतार

छोड़ गई क्या भूली अनजान?

दो

छू मत गंदे हाथों से ये मोती

है तू तो मिट्टी का नर

जोहूँगा बाट देव-कन्या की

ले जाएगी याद आने पर

रूई जैसी कोमल ओ, देव कन्या

बगुला-सा जिसका श्वेत गला।

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ
About the poet

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

‘साहित्यर्थी’ और ‘रसराज’ के रूप में सुप्रसिद्ध असमिया कवि-लेखक-व्यंग्यकार।

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