शब्द आरे की तरह
चीरते हैं लकड़ी
और जाले की पतली दीवार
और घर भी
जहाँ कोई मकड़ी
बुन रही होती है जाला
एक-एक पतले तार से
शब्द आरे की तरह
चीरते हैं लकड़ी
और जाले की पतली दीवार
और घर भी
जहाँ कोई मकड़ी
बुन रही होती है जाला
एक-एक पतले तार से

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017
View profile & all 42 Poems / Stories