शब्द आरे की तरह

चंपा वैदचंपा वैद13 Sept 1930 – 23 Jul 2017

1 min read · 12.4K reads

शब्द आरे की तरह

चीरते हैं लकड़ी

और जाले की पतली दीवार

और घर भी

जहाँ कोई मकड़ी

बुन रही होती है जाला

एक-एक पतले तार से

चंपा वैद
About the poet

चंपा वैद

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017

View profile & all 42 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like