सूर्य अस्त हो रहा है
पहली बार
इस मंज़िल पर
खड़ी वह देखती है
बादलों को
जो टकटकी लगा कर
देख रहे हैं
सूर्य के गोले को
यह गोला आग
लगा जाता है
उसके अंदर
कह जाता है
कल फिर आऊँगा
पूछूँगा क्या सपने देखे?
सूर्य अस्त हो रहा है
पहली बार
इस मंज़िल पर
खड़ी वह देखती है
बादलों को
जो टकटकी लगा कर
देख रहे हैं
सूर्य के गोले को
यह गोला आग
लगा जाता है
उसके अंदर
कह जाता है
कल फिर आऊँगा
पूछूँगा क्या सपने देखे?

सुपरिचित कवयित्री। मूल नाम : चंपा वैद जन्म : 13/09/1930 | पंजाब निधन : 23/07/2017
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