सबसे प्यारी हँसी

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

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जब तुम हँसती हो

तो तुम्हारी ठुड्डी

हौले-से छू लेता हूँ

हथेली में हरसिंगार भर आता है

जब तुम हँसती हो

तो तुम्हारे घुँघराले बालों से

हज़ारों जुगनुओं के झुंड उड़ते हैं

ज़िंदगी रौशनी से भर जाती है

जब तुम हँसती हो

तो मकई की बालियों से

मोती झाँकने लगते हैं

जब तुम हँसती हो

तो लगता है कि

सैकड़ों दाने कंसार में भूँजा बन

साथ-साथ फूट रहे हों

जब तुम हँसती हो

फुनगियाँ भी हवा के संग

डोलना भूल जाती हैं

पृथ्वी अपनी धुरी पर

घूमना भूल जाती है

चाँद चहलक़दमी नहीं करता

टकटकी लगाकर ताकता है

जब तुम हँसती हो तो

हजारों कंचे एक साथ

धरती का माथा चूमते हैं

और जब तुम हँसती हो तो

पिता का सीना समंदर हो जाता है

बनती हुई तस्वीर

मुकम्मल हो जाती है।

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

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