इतना ही सीखता हूँ

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

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इतना ही सीखता हूँ गणित

कि दो और दो को

बस चार ही गिन सकूँ

इतनी ही सीखता हूँ भौतिकी

कि रोटी की ज़रूरत के साथ

हृदय की प्रेम तरंगें

और कंपन भी माप सकूँ

इतना ही सीखता हूँ भूगोल

कि ज़िंदगी की

इस भूलभुलैया में

शाम ढलने तलक

घर की दिशा याद रख सकूँ

इतनी ही सीखता हूँ अँग्रेज़ी

कि देशी अँग्रेज़ों के बीच

स्वाभिमान के साथ

अपनी हिंदी भी बचा सकूँ

इतना ही पढ़ता हूँ तुझे ज़िंदगी

कि दीवार पर उभरी

चूल्हे की कालिख में

परतों की उम्र भी पढ़ सकूँ

उकेरता हूँ ख़ुद को उतना ही

जितना सच बचा है

मेरे अंतस में।

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

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