मसला

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

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रात हमेशा से

दो तारीख़ों का मसला है

जो दिन के उजाले में कभी नहीं होते

अक्सर यह भी सोचता हूँ

कि सारे मसलात

कमबख़्त रातों के साथ ही क्यों होते हैं!

एक बातूनी लड़की

अचानक गुपचुप बैठ जाए

तो मसला दिन में भी पैदा हो जाता है

आग कब की बुझ गई

राख देर तक सुलगती रही

मसला दरअस्ल एक चुनाव है

तिल-तिल जलने

और एकबारगी जल जाने के बीच

जबकि मन है

कि निरंतर जलता जा रहा है

पूरी तरह से बुझ जाने के सच को

ख़ारिज करता हुआ।

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

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