प्रेम में पेड़

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

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कटे हुए ‘तनों’ से छलकता है पानी

छालों का दर्द समझता है पानी

पेड़ समझते हैं पानी का दर्द

और दर्द में मुस्कुराने के माने

पानी की पनाह है

पेड़ की घायल देह

जिसकी छाल के आग़ोश में

सुकून भर ठहरता है पानी

सोखती हुई जड़ें

जब टोहती हैं नमी

और चूमती हैं मिट्टी को

तब पानी बंद पलक पत्ती-पत्ती मुस्काता है

जड़ों को आस पसंद है

और पत्तियों को साँस

जबकि आस और साँस से परे

पेड़ को पसंद है बारिश

मोहती हुई नदी को

टुकुर-टुकुर देखते हैं पेड़

और चूमते हुए थोड़ा और झुकते चले जाते हैं

पानी थोड़ा और मीठा हो जाता है

पेड़ बनाते हैं पानी को और ख़ूबसूरत

दरअस्ल, हर पल पानी के प्रेम में होते हैं पेड़

और झूमते हुए बहती हवा से कहते हैं—

‘प्रेम में प्रतीक्षा का नाम बारिश है’

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

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