About यतींद्र मिश्र
सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।
Selected Quotes
Poetry & Stories
बैजू बावरा
तुम्हारे पास नहीं थी दरबार में घुसने की कलाऔर बादशाह को असीसने वाली बंदिशें
गुर्जरी तोड़ी
यह राग हमें बताता हैकि हम अभी भी विश्वास कर सकते हैं
विभास
यह उत्सुकता जागती हैकबीर ने आख़िरी चादर
कजरी
काले रंग में भी इतना संगीत हो सकता हैयह इससे पहले कौन जानता था
सम्मोहित आलोक
कविता में जहाँ शब्द रखा हैचिमटे से उठाकर वहाँ अंगारा रख दो
About यतींद्र मिश्र
सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।
यतींद्र मिश्र: Quick Answers
Who is यतींद्र मिश्र?
सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।
When was यतींद्र मिश्र born?
यतींद्र मिश्र was born on 12 September 1977. Associated place: अयोध्या, उत्तर प्रदेश.
Where can I read यतींद्र मिश्र's poetry?
Kavishala has 25 poems and stories by यतींद्र मिश्र, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by यतींद्र मिश्र
बैजू बावरा
तुम्हारे पास नहीं थी दरबार में घुसने की कलाऔर बादशाह को असीसने वाली बंदिशें
गुर्जरी तोड़ी
यह राग हमें बताता हैकि हम अभी भी विश्वास कर सकते हैं
विभास
यह उत्सुकता जागती हैकबीर ने आख़िरी चादर
कजरी
काले रंग में भी इतना संगीत हो सकता हैयह इससे पहले कौन जानता था
सम्मोहित आलोक
कविता में जहाँ शब्द रखा हैचिमटे से उठाकर वहाँ अंगारा रख दो
विकल्प
मुसीबत के वक़्त हम क्या करेंगेदरवेशों का क़िस्सा हमारे काम नहीं आएगा
बच्चा और झुनझुना
हर तरफ तोपें गरज रही हैं और फूट रहे हैं बमबारूद की महक से परिचित होने लगी है दुनिया
तानसेन के बहाने
नहीं रहा आलमपनाह का हुज़ूर दरबारऔर वहाँ मौजूद तख़्त-ए-ताऊस में जड़े बसरा दोआब के मोती
तुकाराम
लगभग गैरज़रूरी-सी लगती हुईइस दुनिया की सुघड़ गुंजाइश में एक व्यक्ति
पानी की आवाज़
सत्य रास्ते में पड़े पत्थर की तरह हैउसके ठोकर से खुलती हैं
सहगल का हारमोनियम
एकउस पर बंदिशें टँकी हैं ऐसे
टप्पा और पाकिस्तान
उस तरह तो नहीं थिरकता अब रेगिस्तान का आँगनउस तरह कबीलों में घूमते नहीं ऊँटहार अपने ऊँटों के साथ
Selected Quotes by यतींद्र मिश्र (चुनिंदा उद्धरण)
उस तरह तो नहीं थिरकता अब रेगिस्तान का आँगनउस तरह कबीलों में घूमते नहीं ऊँटहार अपने ऊँटों के साथयह उत्सुकता जागती हैकबीर ने आख़िरी चादरकाले रंग में भी इतना संगीत हो सकता हैयह इससे पहले कौन जानता थाकविता में जहाँ शब्द रखा हैचिमटे से उठाकर वहाँ अंगारा रख दोतुम्हारे पास नहीं थी दरबार में घुसने की कलाऔर बादशाह को असीसने वाली बंदिशेंयह राग हमें बताता हैकि हम अभी भी विश्वास कर सकते हैंVideos on यतींद्र मिश्र
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