यह उत्सुकता जागती है
कबीर ने आख़िरी चादर
किसकी ख़ातिर बुनी होगी?
यह विभास जागता है
एक योगी की यात्रा में
आख़िरी चरण कहाँ पड़े होंगे?
घेरती है यह दुविधा
एक अवधूत और रागी का
अंतिम सबद-कीर्तन
किस तंबूरे पर हुआ होगा पूरा?
यह जो उत्सुकता है
विभास और दुविधा हमारी
अपनी समाप्ति तक पहुँचकर भी
कहाँ हो पाती है आख़िरी?








