विकल्प

यतींद्र मिश्रयतींद्र मिश्र12 Sept 1977

1 min read · 12.4K reads

मुसीबत के वक़्त हम क्या करेंगे

दरवेशों का क़िस्सा हमारे काम नहीं आएगा

निरुपाय धरा रह जाएगा धर्म का पाठ

महीवाल को ढूँढ़ती सोहनी कच्चा घड़ा लिए

चिनाब में उतर जाएगी

अपनी सारी उदारता समेटे सूरज चला जाएगा

दूसरी पृथ्वी की खोज में

परियाँ हमारी नींदों के सिरहाने आने से कतराएँगी

हमारी धमनियों में रक्त को ठंडा करती हुई

गिरेगी चंद्रमा की बर्फ़

अँधेरे में ख़रगोश की आँखों की तरह

अचानक गुम हो जाएगी सबसे प्यारी स्मृति

जब कभी प्रेम के बरअक्स यह दुनिया

सुंदर चीज़ों के विकल्प में बदलती नज़र आएगी

यह तय कर पाना मुश्किल होगा

मुसीबत के वक़्त हम क्या करेंगे।

यतींद्र मिश्र
About the poet

यतींद्र मिश्र

सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

View profile & all 25 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like