मुसीबत के वक़्त हम क्या करेंगे
दरवेशों का क़िस्सा हमारे काम नहीं आएगा
निरुपाय धरा रह जाएगा धर्म का पाठ
महीवाल को ढूँढ़ती सोहनी कच्चा घड़ा लिए
चिनाब में उतर जाएगी
अपनी सारी उदारता समेटे सूरज चला जाएगा
दूसरी पृथ्वी की खोज में
परियाँ हमारी नींदों के सिरहाने आने से कतराएँगी
हमारी धमनियों में रक्त को ठंडा करती हुई
गिरेगी चंद्रमा की बर्फ़
अँधेरे में ख़रगोश की आँखों की तरह
अचानक गुम हो जाएगी सबसे प्यारी स्मृति
जब कभी प्रेम के बरअक्स यह दुनिया
सुंदर चीज़ों के विकल्प में बदलती नज़र आएगी
यह तय कर पाना मुश्किल होगा
मुसीबत के वक़्त हम क्या करेंगे।








