टेसू और गुलमोहर के बीच मीलों की दूरी और उसे पाटती
घाट की प्रतीक्षारत सीढ़ियाँ
शहर में सन्नाटा
तुम्हारे नहीं होने का व्यस्ततम एकालाप है।
हम दोनों अकेले में
एक-दूसरे से मूक प्रेम करते जाते हैं
और देखते रहते हैं
प्रवासी विहगों का बिछोह।
टेसू और गुलमोहर के बीच मीलों की दूरी और उसे पाटती
घाट की प्रतीक्षारत सीढ़ियाँ
शहर में सन्नाटा
तुम्हारे नहीं होने का व्यस्ततम एकालाप है।
हम दोनों अकेले में
एक-दूसरे से मूक प्रेम करते जाते हैं
और देखते रहते हैं
प्रवासी विहगों का बिछोह।

नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय। मूल नाम : उत्कर्ष जन्म : 01/09/1995 | पटना, बिहार
View profile & all 10 Poems / Storiesअनंत ब्रह्मांड में यह पृथ्वीबुनाई का शायद महज़
तब तकगमले में रातरानी लौट चुकी थी
ऐसे समय में जब सब खोज रहे हैं अपना पता—कहीं बाहर—किसी भीड़ में।तुम मुझे खोजना किसी भीड़ से अलग—नदी किनारे।
बरसात हुई बहुत उस रोज़जैसे बादल फट पड़ा हो
यहाँ सन्नाटा है—पसरा हुआ—छूटने की गंध में डूबा।