इश्क़ में दिल बन के दीवाना चला

पंडित दया शंकर नसीम लखनवीपंडित दया शंकर नसीम लखनवी

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इश्क़ में दिल बन के दीवाना चला

आश्ना से हो के बेगाना चला

क़ुलक़ुल-ए-मीना से आती है सदा

भर चुका जिस वक़्त पैमाना चला

बे-ज़बानों को भी आई है ज़बाँ

बेड़ी ग़ुल करती है दीवाना चला

इश्क़-बाज़ी बाज़ी-ए-शतरंज है

चाल नादाँ रह गया दाना चला

शब जो आया बज़्म में वो शोला-रू

शम्अ गुल करने को परवाना चला

बू-ए-गुल ग़ुंचा से कहती है 'नसीम'

बात निकली मुँह से अफ़्साना चला

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
About the poet

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी

उपनाम : 'नसीम' मूल नाम : पंडित दया शंकर कोल जन्म : लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश पंडित दया शंकर नसीम 1811 ई. में लखनऊ में पैदा हुए थे। उनका सम्बंध पंडितों के संभ्रांत और शिक्षित परिवार से था इसलिए उनको भी साहित्य से बेहद दिलचस्पी थी। ज़रूरी शिक्…

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