चाँदनी हर शब को करती है किनारा चाँदनी

पंडित दया शंकर नसीम लखनवीपंडित दया शंकर नसीम लखनवी

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चाँदनी हर शब को करती है किनारा चाँदनी

तेरे ख़ातिर मुँह को दिखलाती है तारा चाँदनी

आज महताबी पे चढ़ता है वो बहर-ए-सैर-ए-माह

जानता हूँ कुछ तिरा चमका सितारा चाँदनी

बे-ज़रूरत ख़ुश नहीं आती जहाँ में कोई चीज़

फ़स्ल-ए-सरमा में नहीं होती गवारा चाँदनी

तू चढ़ा शब को जो महताबी पे बहर-ए-चश्म-ए-बद

आसमाँ से उतरे करने को उतारा चाँदनी

वस्ल की शब का समा आँखों में छाया है मिरे

माह-रू देखे न फिर वैसे दोबारा चाँदनी

रोते रोते डूबता है जब शब-ए-फ़ुर्क़त में दिल

जानता हूँ साफ़ दरिया का किनारा चाँदनी

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
About the poet

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी

उपनाम : 'नसीम' मूल नाम : पंडित दया शंकर कोल जन्म : लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश पंडित दया शंकर नसीम 1811 ई. में लखनऊ में पैदा हुए थे। उनका सम्बंध पंडितों के संभ्रांत और शिक्षित परिवार से था इसलिए उनको भी साहित्य से बेहद दिलचस्पी थी। ज़रूरी शिक्…

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