दर रहा सब पे जो सुख़नवर है

पंडित दया शंकर नसीम लखनवीपंडित दया शंकर नसीम लखनवी

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दर रहा सब पे जो सुख़नवर है

शे'र तेग़-ए-ज़बाँ का जौहर है

बात अपनी ये सुन के कान में डाल

आबरू मिस्ल-ए-आब-ए-गौहर है

'इश्क़ बिन क्या किसी का दिल हो गुज़ार

मोम बे-आग देखे पत्थर है

दिल का देना सरासरी मत जान

जान पर खेलना सरासर है

क्या मुख़ालिफ़ है इस चमन की हवा

ख़ार देता है जो गुल-ए-तर है

नोक रख लो बरहना-पाई की

आबाद ख़ार-ए-दश्त नश्तर है

अब तो जाते हैं उस गुल में 'नसीम'

हो रहेगा जो कुछ मुक़द्दर है

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
About the poet

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी

उपनाम : 'नसीम' मूल नाम : पंडित दया शंकर कोल जन्म : लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश पंडित दया शंकर नसीम 1811 ई. में लखनऊ में पैदा हुए थे। उनका सम्बंध पंडितों के संभ्रांत और शिक्षित परिवार से था इसलिए उनको भी साहित्य से बेहद दिलचस्पी थी। ज़रूरी शिक्…

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