चौराहा और पुस्तकालय

खेमकरण ‘सोमन’खेमकरण ‘सोमन’2 Jun 1984

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चौराहे पर खड़ा आदमी

बरसों से,

खड़ा ही है चौराहे पर

टस से मस भी नहीं हुआ!

जबकि—

पुस्तकालय में खड़ा आदमी

खड़े-खड़े ही पहुँच गया

देश-दुनिया के कोने-कोने में

जैसे हवा-सूरज, धूप-पानी

और बादल

फिर भी देश में

सबसे अधिक हैं चौराहे ही।

खेमकरण ‘सोमन’
About the poet

खेमकरण ‘सोमन’

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। 'नई दिल्ली दो सौ बत्तीस किलोमीटर' चर्चित कविता-संग्रह। मूल नाम : खेमकरण ‘सोमन’ जन्म : 02/06/1984 | नैनीताल, उत्तराखंड

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