About खेमकरण ‘सोमन’
नई पीढ़ी के कवि-लेखक। 'नई दिल्ली दो सौ बत्तीस किलोमीटर' चर्चित कविता-संग्रह। मूल नाम : खेमकरण ‘सोमन’ जन्म : 02/06/1984 | नैनीताल, उत्तराखंड
Selected Quotes
Poetry & Stories
कभी ज़रूर मिलेंगे ओ मेरे दोस्त
देश की राजधानी में भूखकर देती मेरी हत्या
जब बड़ा बनूँगा
लार टपकाते हुए खा लियाबड़ी मछली ने छोटी मछली को
कृतज्ञता की तख्ती लेकर
पेड़ खड़े हैं कृतज्ञ भाव सेधूप के चेहरे पर भी है तेज
दंगे जाति-धर्म तमाशा और युद्ध
वैज्ञानिक खोज रहे हैंरेगिस्तान में पानी बनाने का तरीक़ा
चौराहा और पुस्तकालय
चौराहे पर खड़ा आदमीबरसों से,
About खेमकरण ‘सोमन’
नई पीढ़ी के कवि-लेखक। 'नई दिल्ली दो सौ बत्तीस किलोमीटर' चर्चित कविता-संग्रह।
मूल नाम : खेमकरण ‘सोमन’जन्म : 02/06/1984 | नैनीताल, उत्तराखंड
नई पीढ़ी के कवि-लेखक। 'नई दिल्ली दो सौ बत्तीस किलोमीटर' चर्चित कविता-संग्रह। खेमकरण ‘सोमन’ was born on 2 June 1984. Associated place: नैनीताल, उत्तराखंड. Kavishala has 34 poems and stories by खेमकरण ‘सोमन’, free to read on this page, along with selected quotes you can share.खेमकरण ‘सोमन’: Quick Answers
Who is खेमकरण ‘सोमन’?
When was खेमकरण ‘सोमन’ born?
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Poems & Stories by खेमकरण ‘सोमन’
कभी ज़रूर मिलेंगे ओ मेरे दोस्त
देश की राजधानी में भूखकर देती मेरी हत्या
जब बड़ा बनूँगा
लार टपकाते हुए खा लियाबड़ी मछली ने छोटी मछली को
कृतज्ञता की तख्ती लेकर
पेड़ खड़े हैं कृतज्ञ भाव सेधूप के चेहरे पर भी है तेज
दंगे जाति-धर्म तमाशा और युद्ध
वैज्ञानिक खोज रहे हैंरेगिस्तान में पानी बनाने का तरीक़ा
चौराहा और पुस्तकालय
चौराहे पर खड़ा आदमीबरसों से,
ख़ून से अब नमक निकल रहा है
संघर्ष सेज़िंदगी निकलती है
मज़दूर निहार रहे थे
उस दिनमज़दूर निहार रहे थे अपनी पत्नियों को
उम्मीदों की महक
कहीं पेड़ घट रहे हैंकहीं विचारवान व्यक्ति
पिताजी बहुत हँसते रहते हैं
माँ ख़ुश नहीं होतीयदि होती ज़िंदा—
कलम के कंधे पर इतिहास
भरोसा है इसलिएहवा के कंधे पर पेड़
बचाकर रखना कुछ उम्मीदें
बचाकर रखना अपना विश्वासताकि विश्वास खोया हुआ आदमी समझ सके
स्त्रियों ने कथाएँ कहीं
पुरूषों ने कथाएँ कहींस्त्रियों ने भी कथाएँ कहीं
Selected Quotes by खेमकरण ‘सोमन’ (चुनिंदा उद्धरण)
वैज्ञानिक खोज रहे हैंरेगिस्तान में पानी बनाने का तरीक़ापेड़ खड़े हैं कृतज्ञ भाव सेधूप के चेहरे पर भी है तेजसंघर्ष सेज़िंदगी निकलती हैचौराहे पर खड़ा आदमीबरसों से,बचाकर रखना अपना विश्वासताकि विश्वास खोया हुआ आदमी समझ सकेकहीं पेड़ घट रहे हैंकहीं विचारवान व्यक्तिVideos on खेमकरण ‘सोमन’
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