दृश्य में
लौट कर
पीछे
छूटती सड़क
पर
फिर
अचानक पेड़
घिरती आ रही है शाम
पक्षी है
कि कोई अधखुली-सी गाँठ?
सोचता हूँ मैं अकेला
इस समूचे खेल में यह दृश्य है : क्या शह
या फिर
हमारी मात?
दृश्य में
लौट कर
पीछे
छूटती सड़क
पर
फिर
अचानक पेड़
घिरती आ रही है शाम
पक्षी है
कि कोई अधखुली-सी गाँठ?
सोचता हूँ मैं अकेला
इस समूचे खेल में यह दृश्य है : क्या शह
या फिर
हमारी मात?

सुपरिचित हिंदी कवि, कला-आलोचक, शौक़िया छायाकार, संपादक और चित्रकार। जन्म : 28/12/1952 | जयपुर, राजस्थान हेमंत शेष का जन्म 25 दिसम्बर 1952 को जयपुर, राजस्थान में एक संपन्न और शिक्षित परिवार में हुआ। पिता पेशे से वकील थे और कविताएँ लिखते थे। कविता-लेखन की प्रेरण…
View profile & all 20 Poems / Storiesक़िले की छाया में पहुँचते न पहुँचतेसुनता हूँ हज़ारों चीख़ें आग के रंग से भी ऊँची
त्रास गिरते हैं आसमान से गरजते हुए बिजली की तरहऔर मृत्यु, एक नि:शब्द चौकन्नी बिल्ली :
किसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाललाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होना
महल के अलंकृत छज्जों परलीन होती चिलचिलाती दुपहर
अरावली की हरी देह गिराती है बिंब‘स्वरूपसागर’ ताल के शीशे पर