पूर्णिमा

हेमंत शेषहेमंत शेष28 Sept 1952

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चाँद एक पुरानी पीली बड़ी-सी गेंद नहीं

चंद्रमा है सौ प्रतिशत

तारे आकाश की सिगड़ी में सुलगते अंगारे नहीं

सिर्फ़ तारे हैं

यह रात है

हू-बू-हू पूर्णिमा की रात की तरह

उपमाओं के बिना भी

मैं चाँद और तारों और आकाश की बात करूँगा

इस रात

पूरे चाँद से भरा आकाश देख कर

हेमंत शेष
About the poet

हेमंत शेष

सुपरिचित हिंदी कवि, कला-आलोचक, शौक़िया छायाकार, संपादक और चित्रकार। जन्म : 28/12/1952 | जयपुर, राजस्थान हेमंत शेष का जन्म 25 दिसम्बर 1952 को जयपुर, राजस्थान में एक संपन्न और शिक्षित परिवार में हुआ। पिता पेशे से वकील थे और कविताएँ लिखते थे। कविता-लेखन की प्रेरण…

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