किसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाल
लाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होना
कविता होने के लिए भी
लाल वाली बात सच है।
किसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाल
लाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होना
कविता होने के लिए भी
लाल वाली बात सच है।

सुपरिचित हिंदी कवि, कला-आलोचक, शौक़िया छायाकार, संपादक और चित्रकार। जन्म : 28/12/1952 | जयपुर, राजस्थान हेमंत शेष का जन्म 25 दिसम्बर 1952 को जयपुर, राजस्थान में एक संपन्न और शिक्षित परिवार में हुआ। पिता पेशे से वकील थे और कविताएँ लिखते थे। कविता-लेखन की प्रेरण…
View profile & all 20 Poems / Storiesक़िले की छाया में पहुँचते न पहुँचतेसुनता हूँ हज़ारों चीख़ें आग के रंग से भी ऊँची
त्रास गिरते हैं आसमान से गरजते हुए बिजली की तरहऔर मृत्यु, एक नि:शब्द चौकन्नी बिल्ली :
महल के अलंकृत छज्जों परलीन होती चिलचिलाती दुपहर
अरावली की हरी देह गिराती है बिंब‘स्वरूपसागर’ ताल के शीशे पर
चाँद एक पुरानी पीली बड़ी-सी गेंद नहींचंद्रमा है सौ प्रतिशत