चुनौती थी चीनी की
और नगर के धनी की
इसीलिए चने का साथ छूटा
टूटी दोस्ती पानी की
भूल ही चुके स्वाद
मीठी बानी
कितने तो क़िस्से
कहानी
सब बातें गुम हो गईं नानी की
लेकिन कल कमाल हो गया
दीख गया मुझे वही गुड़़
‘बिग बाज़ार’ में
पारदर्शी पन्नी में पैक
बीसियों महँगी चीज़ों के बीच
पूरी महक के साथ मुस्काता
चकित हो जिसे देखता रहा
बार-बार मैं








