Selected Quotes
Poetry & Stories
इमारतें
सचमुच इतनी ऊँची इमारतें हैं किदेखने वाले की टोपी गिरने का क़िस्सा
न्यौली
दुनिया की सबसे सुरीली आवाज़जो तुम्हें सुनाई दे रही है
रेडियो
वाह रेडियो! तुम तो सचमुचबड़े ग़ज़ब के निकले यार
सीढ़ियों पर खेत
सात साल के बेटे का सवाल सुनकरसोच में पड़ गया मैं
फिर भी
इस विकट कोरोना काल का एक कातर क्षणपंखा सरसरा रहा है
हरि मृदुल: Quick Answers
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Poems & Stories by हरि मृदुल
इमारतें
सचमुच इतनी ऊँची इमारतें हैं किदेखने वाले की टोपी गिरने का क़िस्सा
न्यौली
दुनिया की सबसे सुरीली आवाज़जो तुम्हें सुनाई दे रही है
रेडियो
वाह रेडियो! तुम तो सचमुचबड़े ग़ज़ब के निकले यार
सीढ़ियों पर खेत
सात साल के बेटे का सवाल सुनकरसोच में पड़ गया मैं
फिर भी
इस विकट कोरोना काल का एक कातर क्षणपंखा सरसरा रहा है
रविवार के दिन ढूँढ़ रहा मैं रविवार
कोरोना काल के रविवार का हालसोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और
आमा की आँखें
आमा-1सी ही हैआमा की सुई
टाई
काम ही कुछ ऐसा है किरात-दिन पहले रहता हूँ टाई
ताना-बाना
काशी में इक मिला जुलाहाबोला : हमको ज़रा बताना
हीरोइन
आज मौक़ा मिला उसेकुछ देर ठहर कर सोचने का
मैं बाज़ार में
मैं तो जगा हुआ था भाईन जाने कब हुआ उनींदा
मेरी ज़ुबान
मेरी जीभ कालीमेरी ज़ुबान कड़वी
Selected Quotes by हरि मृदुल (चुनिंदा उद्धरण)
आज मौक़ा मिला उसेकुछ देर ठहर कर सोचने काइस विकट कोरोना काल का एक कातर क्षणपंखा सरसरा रहा हैसचमुच इतनी ऊँची इमारतें हैं किदेखने वाले की टोपी गिरने का क़िस्साकोरोना काल के रविवार का हालसोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार औरसात साल के बेटे का सवाल सुनकरसोच में पड़ गया मैंकाशी में इक मिला जुलाहाबोला : हमको ज़रा बतानाVideos on हरि मृदुल
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