भूख

हरि मृदुलहरि मृदुल

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भूख पेट में नहीं

आँखों में है

आँखों में चमक आती जा रही है

भूख भी बढ़़ती जा रही है

यह इस दौर की सबसे बड़ी बीमारी

परंतु इसका इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं

यह महामारी की शक्ल ले रही है

लोग तेज़ी से इसकी गिरफ़्त में आते जा रहे हैं

यह किसी छूत के रोग की तरह

इतनी संक्रामक कि देखने भर से ही

रोग लगने की संभावना

यह अंतड़ियाँ नहीं सुखा रही

गला नहीं रही हड्डियाँ

काया को अस्थिपंजर नहीं बना रही

दरअस्ल संवेदना को शुष्क करने के साथ हुई है

इस बीमारी की शुरूआत

और अंत

मनुष्य को राक्षस बनाने के साथ होना है

हरि मृदुल
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हरि मृदुल

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