लगता है पृथ्वी में समस्त दृश्य ही है पुनरावृत्तियों का
मनुष्य रहेगा बैठा, घास पर उसका प्रेम
छिलके उतारे हुए समस्त मूँगफली के हृदय-हृदय में
स्वयं को स्थापित करता रहेगा।
लगता है पृथ्वी में समस्त दृश्य ही है पुनरावृत्तियों का
मनुष्य रहेगा बैठा, घास पर उसका प्रेम
छिलके उतारे हुए समस्त मूँगफली के हृदय-हृदय में
स्वयं को स्थापित करता रहेगा।

यह छाया, सुनिविड़ संतान है तुम्हारीऔर फल—तुम्हारा पतन;
ज़िंदा हूँज़िंदा रहूँगा
सिरहाने मृत्यु की छाप नहीं आती है जब तकउससे पहले जानता हूँ तुम नहीं रुकोगी स्मृति।
आगामी वसंत में हो सकता हूँ मैं और भी अधिक नष्ट—रहस्यमय प्रकाश, प्रीतिमय पाप की प्रतीक्षा से
एक दिनएक चिड़िया के बराबर