तुम्हें

बिप्लव चौधुरीबिप्लव चौधुरी

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लगता है पृथ्वी में समस्त दृश्य ही है पुनरावृत्तियों का

मनुष्य रहेगा बैठा, घास पर उसका प्रेम

छिलके उतारे हुए समस्त मूँगफली के हृदय-हृदय में

स्वयं को स्थापित करता रहेगा।

बिप्लव चौधुरी
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बिप्लव चौधुरी

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