About हरेकृष्ण डेका
सुप्रसिद्ध असमिया कवि-कथाकार-समालोचक और अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
Selected Quotes
Poetry & Stories
मुड़कर देखना
एक बार एक कुएँ के पास अकेला खड़ाथा और कुएँ के अंदर झाँककर देखा।
चाँदनी में ताज
(भ्रमण के एक दिन)आसमान के बीचों-बीच शारदी पूनो का चाँद
कोई दूसरा
आईने में दिखाई दे रहा शख़्स ही क्या मैं हूँ?काले-सफ़ेद खिचड़ी बाल, लंबी ठुड्डी, सलवट भरी भौं,
खिलना
तुम्हारी आँखों के दर्पण में दिखता हैएक सूर्यमुखी
झंडा
हमारे शहर के मैदान मेंउत्सव की बहार है।
About हरेकृष्ण डेका
सुप्रसिद्ध असमिया कवि-कथाकार-समालोचक और अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
हरेकृष्ण डेका: Quick Answers
Who is हरेकृष्ण डेका?
सुप्रसिद्ध असमिया कवि-कथाकार-समालोचक और अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
Where can I read हरेकृष्ण डेका's poetry?
Kavishala has 7 poems and stories by हरेकृष्ण डेका, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by हरेकृष्ण डेका
मुड़कर देखना
एक बार एक कुएँ के पास अकेला खड़ाथा और कुएँ के अंदर झाँककर देखा।
चाँदनी में ताज
(भ्रमण के एक दिन)आसमान के बीचों-बीच शारदी पूनो का चाँद
कोई दूसरा
आईने में दिखाई दे रहा शख़्स ही क्या मैं हूँ?काले-सफ़ेद खिचड़ी बाल, लंबी ठुड्डी, सलवट भरी भौं,
खिलना
तुम्हारी आँखों के दर्पण में दिखता हैएक सूर्यमुखी
झंडा
हमारे शहर के मैदान मेंउत्सव की बहार है।
उज्जीवन
अपने शीशमहल मेंरचता हूँ सपनों का उद्यान
देखना
कहाँ देखा था तुम्हें!निर्मल आकाश में
Selected Quotes by हरेकृष्ण डेका (चुनिंदा उद्धरण)
(भ्रमण के एक दिन)आसमान के बीचों-बीच शारदी पूनो का चाँदअपने शीशमहल मेंरचता हूँ सपनों का उद्यानआईने में दिखाई दे रहा शख़्स ही क्या मैं हूँ?काले-सफ़ेद खिचड़ी बाल, लंबी ठुड्डी, सलवट भरी भौं,कहाँ देखा था तुम्हें!निर्मल आकाश मेंहमारे शहर के मैदान मेंउत्सव की बहार है।तुम्हारी आँखों के दर्पण में दिखता हैएक सूर्यमुखीVideos on हरेकृष्ण डेका
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