खिलना

हरेकृष्ण डेकाहरेकृष्ण डेका

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तुम्हारी आँखों के दर्पण में दिखता है

एक सूर्यमुखी

मेरे हृदय के पतित कोने में जो

अरसे बाद जी उठा है।

उसकी ताज़ा पँखुड़ियों में तुम्हारी हँसी

सुबह की किरणों जैसी चमक रही है।

बाहर की रोशनी से कभी-कभी आँखें ढँक जाती हैं।

बरसाती नदी की तरह

उफन आती तुम्हारी अतल भावनाओं की गहराई

उसे शायद माप नहीं सकता ठीक-ठीक।

आज अपने स्पर्श का विद्युत संकेत तुम्हें भेजा है।

मेरे हृदय से पार हो जाए बारिश का वेग

उसके स्पर्श से स्मृति की जड़ता तोड़

अनंत प्रवाह में चमक उठे

मेरा दैवत खिला सूर्यमुखी।

हरेकृष्ण डेका
About the poet

हरेकृष्ण डेका

सुप्रसिद्ध असमिया कवि-कथाकार-समालोचक और अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

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