देखना

हरेकृष्ण डेकाहरेकृष्ण डेका

1 min read · 12.4K reads

कहाँ देखा था तुम्हें!

निर्मल आकाश में

या

घास के मैदान में?

धुंध में छिपे पहाड़ पर

आ लुईत की

लाल छाती में?

अब याद नहीं है

मेरे पथ में है

आज केवल

कीचड़ और गर्द।

वहाँ भी क्या

तुम ही

मिलोगी?

हरेकृष्ण डेका
About the poet

हरेकृष्ण डेका

सुप्रसिद्ध असमिया कवि-कथाकार-समालोचक और अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

View profile & all 7 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like