एक बार एक कुएँ के पास अकेला खड़ा
था और कुएँ के अंदर झाँककर देखा।
कुएँ के अंदर अपने प्रतिबिंब को अंगुली दिखाई।
जीभ निकालकर चिढ़ाया।
और उसके बाद एक चीख निकाली। कुएँ के अंदर से
एक छोटे बच्चे ने एक चीख वापस भेजी।
बाद में कुएँ के अंदर के मेंढ़क कूदने लगे
तब काँप रहे कुएँ के पानी से
छोटा बच्चा ग़ायब हो गया।
कुएँ का पानी इतना स्थिर था
दिन इतना स्थिर था
मेंढ़क यदि न कूदने लगते तो शायद
मैं वैसे ही खेलता रहता।
बीच-बीच में अब भी मन करता है
कुएँ के अंदर झाँकने का
और बिना कुछ किए
कुएँ के अंदर वाले आदमी को चिढ़ाते रहने का।
इतिहास के अब तक के बड़े भूकंप में
कुएँ के दोनों पाट धँस गए
दब चुके कुएँ का पानी
किस वैतरणी में मिल गया होगा?








