About उस्मान ख़ान
नई पीढ़ी के कवि-आलोचक। मूल नाम : उस्मान ख़ान जन्म : 12/07/1984 | मंदसौर, मध्य प्रदेश उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मालवा के लोक–साहित्य पर पी.एच.डी. किया है और फ़िलहाल रतलाम के एक कॉलेज में अध्यापन कर रहे हैं।
Selected Quotes
Poetry & Stories
बाक़ी प्रेम कविताएँ
लाल धधकते लोहे के टुकड़ेतुम्हारी आँखें,
बचपन से लिंग अब तक
बचपन में,बच्चों से बच्चा था मैं
मरीज़ का नाम
चाहता हूँकिसी शाम तुम्हें गले लगाकर ख़ूब रोना
अतिशयोक्तिपूर्ण
मेरे पासमंगतों-सी सड़क पर परेशान करती
मैं एक बंधक विद्रोही के स्वप्न में हूँ
[1]यह एक स्वप्न है, एक महामायामय मज़बूत उत्तेजित यातनागृह है,
About उस्मान ख़ान
नई पीढ़ी के कवि-आलोचक।
मूल नाम : उस्मान ख़ान
जन्म : 12/07/1984 | मंदसौर, मध्य प्रदेश
उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मालवा के लोक–साहित्य पर पी.एच.डी. किया है और फ़िलहाल रतलाम के एक कॉलेज में अध्यापन कर रहे हैं।
उस्मान ख़ान: Quick Answers
Who is उस्मान ख़ान?
नई पीढ़ी के कवि-आलोचक। मूल नाम : उस्मान ख़ान जन्म : 12/07/1984 | मंदसौर, मध्य प्रदेश उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं।
When was उस्मान ख़ान born?
उस्मान ख़ान was born on 12 July 1984. Associated place: मंदसौर, मध्य प्रदेश.
Where can I read उस्मान ख़ान's poetry?
Kavishala has 8 poems and stories by उस्मान ख़ान, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by उस्मान ख़ान
बाक़ी प्रेम कविताएँ
लाल धधकते लोहे के टुकड़ेतुम्हारी आँखें,
बचपन से लिंग अब तक
बचपन में,बच्चों से बच्चा था मैं
मरीज़ का नाम
चाहता हूँकिसी शाम तुम्हें गले लगाकर ख़ूब रोना
अतिशयोक्तिपूर्ण
मेरे पासमंगतों-सी सड़क पर परेशान करती
मैं एक बंधक विद्रोही के स्वप्न में हूँ
[1]यह एक स्वप्न है, एक महामायामय मज़बूत उत्तेजित यातनागृह है,
क़तई राजनैतिक
मैं देखता हूँअपने देश के गली-कूचों की बदरंग दीवारें
एकांता
एकांता,तुम्हीं करो नोट
मैं इस पल के छोर पर
मैं इस पल के छोर परसभ्यताओं का टूटना देखता हूँ
Selected Quotes by उस्मान ख़ान (चुनिंदा उद्धरण)
बचपन में,बच्चों से बच्चा था मैंमेरे पासमंगतों-सी सड़क पर परेशान करतीमैं इस पल के छोर परसभ्यताओं का टूटना देखता हूँमैं देखता हूँअपने देश के गली-कूचों की बदरंग दीवारेंलाल धधकते लोहे के टुकड़ेतुम्हारी आँखें,चाहता हूँकिसी शाम तुम्हें गले लगाकर ख़ूब रोनाVideos on उस्मान ख़ान
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