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Kavishala has 7 poems and stories by भगतसिंह सोनी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by भगतसिंह सोनी
हाथ पर हाथ धरे
सूर्य तुमने मुझे अँधेरे में रखाबताया कुछ भी नहीं मुझे
वृक्ष काटना
वह औरत जंगल सेलकड़ियाँ बीनकर लाती है
कवि-कर्म
जब पड़ोस में आग लगी हुई होतो मैं कैसे कर सकता हूँ कवि-कर्म
हड्डी का दर्द
हल्के पीलेपन-युक्त सफ़ेद हड्डियों के जोड़चटख़ रहे हैं
पर हँसा नहीं
अपने लिएमैं थोड़ी देर और रुक सकता था
सूर्योदय
शीलू के लिएतुम्हें जाते हुए देखकर
स्मृति
जैसे-जैसे उमर बढ़ती जाती है हमारे दिमाग़ में स्मृतियोंका ख़ज़ाना बनने लगता है। ख़ज़ाने में लगातार और-और
Selected Quotes by भगतसिंह सोनी (चुनिंदा उद्धरण)
अपने लिएमैं थोड़ी देर और रुक सकता थाजैसे-जैसे उमर बढ़ती जाती है हमारे दिमाग़ में स्मृतियोंका ख़ज़ाना बनने लगता है। ख़ज़ाने में लगातार और-औरहल्के पीलेपन-युक्त सफ़ेद हड्डियों के जोड़चटख़ रहे हैंशीलू के लिएतुम्हें जाते हुए देखकरवह औरत जंगल सेलकड़ियाँ बीनकर लाती हैसूर्य तुमने मुझे अँधेरे में रखाबताया कुछ भी नहीं मुझेVideos on भगतसिंह सोनी
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