कुछ खिलौने कभी आँगन में दिखाई देते
काश हम भी किसी बच्चे को मिठाई देते
सूने पनघट का कोई दर्द-भरा गीत थे हम
शहर के शोर में क्या तुझ को सुनाई देते
कहीं बे-नूर न हो जाएँ वो बूढ़ी आँखें
घर में डरते थे ख़बर भी मिरे भाई देते
साथ रहने से भी खिल जाते हैं रिश्तों के कँवल
बंदिशें रोने लगीं मुझ को रिहाई देते
इन सिसकते हुए रिश्तों के कहाँ थे क़ाइल
वर्ना हम और तुझे दाग़-ए-जुदाई देते
सिसकियाँ उस की न देखी गईं मुझ से 'रा'ना'
रो पड़ा मैं भी उसे पहली कमाई देते








