पर हँसा नहीं

भगतसिंह सोनीभगतसिंह सोनी

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अपने लिए

मैं थोड़ी देर और रुक सकता था

पर रुका नहीं।

मैं थोड़ी-सी हँसी और हँस सकता था

पर हँसा नहीं

जबकि मैं हँसना और रुकना चाहता था।

मुझे अफ़सोस नहीं है कि

मैं ज़रूरत पर हँसा और रुका नहीं

ज़रूरत पर मैंने बहुतेरे काम नहीं किए।

कल मैं उसकी ज़रूरत पर हँसूँगा

उसके रोकने पर रुकूँगा

उसके अफ़सोस पर अफ़सोस करूँगा।

अपने लिए

रोते हुए

उसके लिए हँसूँगा।

भगतसिंह सोनी
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भगतसिंह सोनी

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