पंचवर्षीय अकाल

बच्चा लाल 'उन्मेष'बच्चा लाल 'उन्मेष'

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पाँच वर्षों के समय-काल में

हमारे अधिकार

अकाल की चपेट में लाए जाते हैं

और फिर बाँटे जाते हैं

राहत सामग्री के रूप में

पाँच किलो राशन

चुनाव का दौर तो

महज संधिकाल होता है

जहाँ बर्बर शेर भी

मेमने के साथ होता है

भेड़िए प्रचारक की भूमिका में होते हैं

शेर को शाकाहारी सिद्ध करा देते हैं

गिद्ध भी समर्थन करते हैं

और गिद्धों को शेर के समर्थन के एवज़ में

मिलता हैं

पंचवर्षीय अकाल का जश्न

शेर, गिद्ध और भेड़िए

संधिकाल के बाद

फिर वही अकाल लाते हैं

और मिल बाँटकर खाते हैं

अब मेमना उनकी थाल में होता है

भेड़िया, शेर के साथ मेमने की खाल में होता है

बच्चा लाल 'उन्मेष'
About the poet

बच्चा लाल 'उन्मेष'

सुपरिचित कवि। 'कौन जात हो भाई', 'छिछले प्रश्न गहरे उत्तर' और 'बहार के पतझड़' शीर्षक से तीन कविता-संग्रह प्रकाशित।

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