खोजा नहीं कोई गाँव

बा. सी. मर्ढेकरबा. सी. मर्ढेकर1 Dec 1909 – 20 Mar 1956

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खोजा नहीं कोई गाँव,

पूछा नहीं नाम-धाम।

सिर्फ़ चलती हुई लोक पर

ख़ुद को चढ़ाया नीलाम।

मन के कितने पाप

रास्ते पर करता गया

और हे प्रभु, तुम्हें देता रहा

जी-भर के गालियाँ।

बरसातें आईं और चली गईं

दो-दो युद्ध जमा हुए।

रास्ते के खम्भों की बिजली

कितनी बार आई गई।

मन के इस पातक के

बनेंगे क्रिस्टल

और अब भी जिह्वा पर

चुनिन्दा गाली बची है।

यही दान देना हे प्रभु,

कभी न गले मेरी यह जिह्वा।

बा. सी. मर्ढेकर
About the poet

बा. सी. मर्ढेकर

मराठी नवकाव्य के अग्रणी कवि और लेखक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : बाळ सीताराम मर्ढेकर जन्म : 01/12/1909 | फैज़पुर, महाराष्ट्र निधन : 20/03/1956 | देहली, दिल्ली

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