गीले पीपे में मरे हुए चूहे :
गरदनें पड़ी हुईं, बिना किसी मोड़ के
होठों से मिले हुए होठ
सिर डले हैं : आसक्ति के बिना।
ग़रीब बेचारे, बिलों में जिए
और मरे पीपे में, हिचकी लेकर
भूरी आँखों से देखा दिन,
गात्र लिंग धोकर, दिन बीते।
ज़िंदा रहने पर बंदिश है,
मरने पर भी बंदिश है,
उदासी को ज़हरी आँखें हैं
वे भी काँच की,
शहद का छत्ता
होठों पर जो जमा हुआ
वह भी 'बैक्लाइट' का, 'बैक्लाइट' का
होठों पर जुड़े हुए होठ
पीपे में चूहों ने स्नान किया
स्नान किया।








