About बा. सी. मर्ढेकर
मराठी नवकाव्य के अग्रणी कवि और लेखक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : बाळ सीताराम मर्ढेकर जन्म : 01/12/1909 | फैज़पुर, महाराष्ट्र निधन : 20/03/1956 | देहली, दिल्ली
Selected Quotes
Poetry & Stories
बत्तियों से पंक्चर हो गई है रात
गो कि बत्तियों से पंक्चर हो गई है रातफिर भी कोई अँधेरे में करता है पंप।
आया आषाढ़ सावन
आया आषाढ़ सावनआई पावस की झड़ी
जो अज्ञान में जनमे
जो अज्ञान में जनमे, और अज्ञान में ही मरे,उनको हे भगवान्, क्या कलेजे से लगाया तूने?
गीले पीपे में मरे हुए चूहे
गीले पीपे में मरे हुए चूहे :गरदनें पड़ी हुईं, बिना किसी मोड़ के
सुबह-सुबह उठ के
सुबह-सुबह उठ के, पीना चाय औ’ काफ़ी;और तुरंत पकड़ना विद्युत की ट्रेन।
About बा. सी. मर्ढेकर
मराठी नवकाव्य के अग्रणी कवि और लेखक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
मूल नाम : बाळ सीताराम मर्ढेकरजन्म : 01/12/1909 | फैज़पुर, महाराष्ट्रनिधन : 20/03/1956 | देहली, दिल्ली
मराठी नवकाव्य के अग्रणी कवि और लेखक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। बा. सी. मर्ढेकर was born on 1 December 1909. Associated place: फैज़पुर, महाराष्ट्र. बा. सी. मर्ढेकर passed away on 20 March 1956. Kavishala has 6 poems and stories by बा. सी. मर्ढेकर, free to read on this page, along with selected quotes you can share.बा. सी. मर्ढेकर: Quick Answers
Who is बा. सी. मर्ढेकर?
When was बा. सी. मर्ढेकर born?
When did बा. सी. मर्ढेकर die?
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Poems & Stories by बा. सी. मर्ढेकर
बत्तियों से पंक्चर हो गई है रात
गो कि बत्तियों से पंक्चर हो गई है रातफिर भी कोई अँधेरे में करता है पंप।
आया आषाढ़ सावन
आया आषाढ़ सावनआई पावस की झड़ी
जो अज्ञान में जनमे
जो अज्ञान में जनमे, और अज्ञान में ही मरे,उनको हे भगवान्, क्या कलेजे से लगाया तूने?
गीले पीपे में मरे हुए चूहे
गीले पीपे में मरे हुए चूहे :गरदनें पड़ी हुईं, बिना किसी मोड़ के
सुबह-सुबह उठ के
सुबह-सुबह उठ के, पीना चाय औ’ काफ़ी;और तुरंत पकड़ना विद्युत की ट्रेन।
खोजा नहीं कोई गाँव
खोजा नहीं कोई गाँव,पूछा नहीं नाम-धाम।
Selected Quotes by बा. सी. मर्ढेकर (चुनिंदा उद्धरण)
सुबह-सुबह उठ के, पीना चाय औ’ काफ़ी;और तुरंत पकड़ना विद्युत की ट्रेन।आया आषाढ़ सावनआई पावस की झड़ीगीले पीपे में मरे हुए चूहे :गरदनें पड़ी हुईं, बिना किसी मोड़ केखोजा नहीं कोई गाँव,पूछा नहीं नाम-धाम।जो अज्ञान में जनमे, और अज्ञान में ही मरे,उनको हे भगवान्, क्या कलेजे से लगाया तूने?गो कि बत्तियों से पंक्चर हो गई है रातफिर भी कोई अँधेरे में करता है पंप।Videos on बा. सी. मर्ढेकर
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